काव्य सदैव से ही मानव के अंतर्मन से उमड़ने वाले भावों, संवेदनाओं और व्यथा को प्रकट करने , समझने का एक अनुपम माध्यम रहा है।काव्य की व्यापकता हर्ष में, विषाद में, प्रेम में, मिलन और बिछोह में, मित्रता और शत्रुता में, विस्तृत है। सभी प्रकार के मनभावों में काव्य प्रस्फुटित होकर हृदय को आलोकित कर देता है। इन उदगारों का हाथ थामकर जो कुछ भी कलम, कागज से मिलकर सृजित करती है उसे साझा करने का एक प्रयास है: अंतर्मन की कविता काव्य संग्रह।। "काव्याँश"
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बुधवार, 6 अप्रैल 2022
ये राही मन...My traveler heart
उन गलियों में जाना चाहे ।
उन में फिर खो जाना चाहे ।
उन राहो के पत्थर को ,
सीखा ऊँचा करना सर को ।।
फिर मिलने की अभिलाषा,
सीखी दिल ने प्रेम की भाषा ।।
मन के कोमल जज्बातों को ,
उन दिवसों उन रातों को ।
छूने को उन फूलों को ।
पीछे छोड़ा शूलों को ।।
छद्म रूप धर जिन मित्रों से ,
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kavita...कविता
हार जीत परिणाम समर का नही वीरता का पैमाना निश्छल जिसने युद्ध लड़ा नियति ने सत्यवीर उसे माना मेरी पलकों और नींदों का रहा हमेशा ब...
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