काव्य सदैव से ही मानव के अंतर्मन से उमड़ने वाले भावों, संवेदनाओं और व्यथा को प्रकट करने , समझने का एक अनुपम माध्यम रहा है।काव्य की व्यापकता हर्ष में, विषाद में, प्रेम में, मिलन और बिछोह में, मित्रता और शत्रुता में, विस्तृत है। सभी प्रकार के मनभावों में काव्य प्रस्फुटित होकर हृदय को आलोकित कर देता है। इन उदगारों का हाथ थामकर जो कुछ भी कलम, कागज से मिलकर सृजित करती है उसे साझा करने का एक प्रयास है: अंतर्मन की कविता काव्य संग्रह।। "काव्याँश"
रविवार, 24 अप्रैल 2022
रास्ते और मंजिल...paths and destinations
मंगलवार, 29 मार्च 2022
रास्ते और तनहाई, WAYS AND LONELINESS
रास्ते भी चाहते है पल यहां तन्हाहियो के ...
वे भी आजिज आ चुके हैं धूप और परछाइयों से ..
जाने कितने पैरों ने अपने बोझ से इनको दबाया..
इनकी पीड़ा को जो समझे कोई मुसाफिर ऐसा न आया ।
❤ कैलाश सती "काव्याँश"
Ways are also wanted moments for loneliness...
They too are fed up with the sun and shadows..
how many feet pressed them with their burden..
No traveler, who understood their pain, came like this..
kavita...कविता
हार जीत परिणाम समर का नही वीरता का पैमाना निश्छल जिसने युद्ध लड़ा नियति ने सत्यवीर उसे माना मेरी पलकों और नींदों का रहा हमेशा ब...
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हार जीत परिणाम समर का नही वीरता का पैमाना निश्छल जिसने युद्ध लड़ा नियति ने सत्यवीर उसे माना मेरी पलकों और नींदों का रहा हमेशा ब...
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रात की बाहों में भटके, चांद अपनी नींद ढूंढे। याचक बनी प्यासी धरा, मेघों में शीतल बूंद ढूंढे। पुष्प ढूंढे एक भ्रमर जो, प्रेम का निश्छल पुजारी...
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महल रेतों के बनते थे हमारी भी हथेली से कभी ऐसा हुनर भी था हाथों की लकीरों में... "काव्याँश" Palaces used to be made of sand, eve...
