काव्य सदैव से ही मानव के अंतर्मन से उमड़ने वाले भावों, संवेदनाओं और व्यथा को प्रकट करने , समझने का एक अनुपम माध्यम रहा है।काव्य की व्यापकता हर्ष में, विषाद में, प्रेम में, मिलन और बिछोह में, मित्रता और शत्रुता में, विस्तृत है। सभी प्रकार के मनभावों में काव्य प्रस्फुटित होकर हृदय को आलोकित कर देता है। इन उदगारों का हाथ थामकर जो कुछ भी कलम, कागज से मिलकर सृजित करती है उसे साझा करने का एक प्रयास है: अंतर्मन की कविता काव्य संग्रह।। "काव्याँश"
शुक्रवार, 24 जून 2022
कौन सुनेगा कविताओं को...Who will listen to the poems?
गुरुवार, 23 जून 2022
समझने और समझाने में..To understand and explain
मृगतृष्णा ..The mirage
बुधवार, 22 जून 2022
मैं भी स्वप्न कोई देखूं ... I can also dream something
रविवार, 10 अप्रैल 2022
शामें..The evenings
न दिन की धूप की गर्मी , न रातों सी ठिठुरती हैं ।
अजब होती हैं शामें भी, पिघलतीं है न जमतीं हैं ।।
छुड़ाती हैं जब दामन ये दिन के उजालों से ।
उसी पल रात की स्याही भी आँखों में सजातीं हैं ।।
बुनती हैं अधूरे ख्वाब लिखतीं है ये पलकों पर ।
सुनहरी सुबह की उम्मीद ये मन में जगातीं हैं ।।
कोई खोया हुआ चेहरा, कोई जो साथ टूटा हो ।
अपना सा कोई साया या कोई हाथ छूटा हो ।।
सभी जज़्बात इनमे है मधुर अहसास देती है ।
इनमे खास है सब कुछ ये शामें खास होती हैं...
"काव्याँश "
Neither the heat of the sun of the day nor the chills of the night.
Even the evenings are strange, they do not melt or freeze.
When you get rid of it from the light of day.
At that very moment the ink of the night also adorns the eyes.
Weavs, writes unfulfilled dreams, it writes on the eyelids.
They awaken the hope of a golden morning.
A lost face, someone who is broken with.
Some shadow or any hand has been left behind.
All the emotion is there, it gives sweet feeling.
Everything is special in them, these evenings are special...
शनिवार, 2 अप्रैल 2022
कोई भी तो नहीं है साथ...There is no one accompanied
गुरुवार, 31 मार्च 2022
मैं दीप जलाया करता हूं, I light a lamp
मैं दीप जलाया करता हूं
मंगलवार, 29 मार्च 2022
रास्ते और तनहाई, WAYS AND LONELINESS
रास्ते भी चाहते है पल यहां तन्हाहियो के ...
वे भी आजिज आ चुके हैं धूप और परछाइयों से ..
जाने कितने पैरों ने अपने बोझ से इनको दबाया..
इनकी पीड़ा को जो समझे कोई मुसाफिर ऐसा न आया ।
❤ कैलाश सती "काव्याँश"
Ways are also wanted moments for loneliness...
They too are fed up with the sun and shadows..
how many feet pressed them with their burden..
No traveler, who understood their pain, came like this..
रविवार, 27 मार्च 2022
अंतर्मन , INNER
अंतर्मन के भावों ने यूं शब्दों का आकार लिया क्यूं।
तोड़ हृदय के तटबंधों को, बह जाना स्वीकार किया क्यूं।।
जब तक थे अनकहे ये मन में सम्मानित थे अभिमानित थे।
अपनी ही मर्यादा लांघी, और अपना ही व्यापार किया क्यूं।।
कैलास "काव्यांश"
Why did the feelings of the inner take the shape of words in this way?
Broke the embankments of the heart, accepted it to be washed away.
As long as they were untold, they were honored in the mind.
why did they cross their own limits and did their own business.
kavita...कविता
हार जीत परिणाम समर का नही वीरता का पैमाना निश्छल जिसने युद्ध लड़ा नियति ने सत्यवीर उसे माना मेरी पलकों और नींदों का रहा हमेशा ब...
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हार जीत परिणाम समर का नही वीरता का पैमाना निश्छल जिसने युद्ध लड़ा नियति ने सत्यवीर उसे माना मेरी पलकों और नींदों का रहा हमेशा ब...
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रात की बाहों में भटके, चांद अपनी नींद ढूंढे। याचक बनी प्यासी धरा, मेघों में शीतल बूंद ढूंढे। पुष्प ढूंढे एक भ्रमर जो, प्रेम का निश्छल पुजारी...
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महल रेतों के बनते थे हमारी भी हथेली से कभी ऐसा हुनर भी था हाथों की लकीरों में... "काव्याँश" Palaces used to be made of sand, eve...




